झारखंड

झारखंड के मछली पालकों को मिलेगा बीमा कवच नुकसान की भरपाई करेगी योजना

nidhi
20 Aug 2026 11:48 AM IST
झारखंड के मछली पालकों को मिलेगा बीमा कवच नुकसान की भरपाई करेगी योजना
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मत्स्य किसानों के लिए राहत जलीय कृषि बीमा से घटेगा आर्थिक जोखिम
रांची: झारखंड में मछली पालन से जुड़े किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में जलीय कृषि (Aquaculture) को बढ़ावा देने और मछली पालकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए बीमा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अब मछली पालन के दौरान प्राकृतिक आपदा, बीमारी या अन्य कारणों से होने वाले नुकसान की भरपाई बीमा के माध्यम से की जा सकेगी।
मत्स्य पालन राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का बड़ा माध्यम बन रहा है। बड़ी संख्या में किसान तालाबों में मछली पालन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। लेकिन कई बार बाढ़, सूखा, जल प्रदूषण, मछलियों में बीमारी और अन्य कारणों से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए जलीय कृषि बीमा को उपयोगी कदम माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य मछली पालकों को संकट के समय आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। बीमा कवर मिलने से यदि किसी कारण से तालाब में पाली गई मछलियों को नुकसान होता है तो किसानों को राहत राशि मिल सकेगी। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और वे बड़े स्तर पर मत्स्य पालन के लिए आगे आ सकेंगे।
मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा
झारखंड सरकार लगातार मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। राज्य में तालाबों के विकास, मछली बीज उपलब्ध कराने और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण देने जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। जलीय कृषि बीमा से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे जोखिम के डर से पीछे नहीं हटेंगे। मछली पालन में निवेश करने वाले किसानों को अब नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा
मछली पालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौसम से जुड़ी समस्याएं होती हैं। भारी बारिश से तालाबों का पानी बह जाना, बाढ़ से मछलियों का नुकसान होना या बीमारी फैलने जैसी परिस्थितियों में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। बीमा योजना ऐसे हालात में किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। इससे किसान दोबारा अपने व्यवसाय को शुरू करने में सक्षम हो सकेंगे।
रोजगार और आय बढ़ाने पर जोर
मत्स्य पालन को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के बड़े माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसान मछली पालन से जुड़ें और उनकी आय में बढ़ोतरी हो।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भी मछुआरों और मछली किसानों के कल्याण, बीमा सहायता और मत्स्य क्षेत्र के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा सुविधा मिलने से आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन अपनाने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी। इससे राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। झारखंड के मछली पालक किसानों के लिए यह पहल आर्थिक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यदि अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचता है तो राज्य में जलीय कृषि क्षेत्र को नई गति मिल सकती है।
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